ITR Forms: शुरू हुआ आयकर रिटर्न का नया सीजन, जानें आपके लिए सही है कौन सा फॉर्म?

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नए वित्त वर्ष 2024-25 की शुरुआत हो चुकी है. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने रिटर्न फाइलिंग पोर्टल पर विभिन्न आईटीआर फॉर्म्स को फिर से इनेबल कर दिया. इसके साथ ही इनकम टैक्स रिटर्न भरने का नया सीजन शुरू हो गया है. अब आप असेसमेंट ईयर 2024-25 के लिए कभी भी इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर सकते हैं, जिसकी डेडलाइन 31 जुलाई तक है.

खुद से भी भर सकते हैं आईटीआर

इनकम टैक्स रिटर्न भरना काफी सावधानी वाला काम है. बहुत सारे लोग इसके लिए प्रोफेशनल्स की मदद लेते हैं, जबकि खुद से आईटीआर फाइल करने वालों की भी बड़ी संख्या है. अगर आप खुद से इनकम टैक्स रिटर्न भरना चाहते हैं तो सबसे पहली समस्या इस बात की आती है कि आपको कौन सा आईटीआर फॉर्म भरना चाहिए.

6 प्रकार के होते हैं रिटर्न के फॉर्म

इनकम टैक्स रिटर्न के लिए कुल 6 प्रकार के फॉर्म होते हैं. अगर आप गलत फॉर्म के साथ रिटर्न भरेंगे तो डिपार्टमेंट उसे डिफेक्टिव बताकर रिजेक्ट कर देगा. इसे सही से चुनने के लिए इनकम के नेचर को समझना जरूरी है. आइए जानते हैं कि आपको रिटर्न फाइल करते समय किस फॉर्म का चयन करना है…

ITR-1: अगर आप भारतीय नागरिक हैं और आपकी कमाई 50 लाख रुपये तक है, तो यह फॉर्म चुन सकते हैं. हालांकि आमदनी का जरिया सैलरी, फैमिली पेंशन, एक आवासीय संपत्ति आदि होनी चाहिए. खेती (कृषि) से 5,000 रुपये तक की आय होने पर भी आईटीआर-1 भर सकते हैं. हालांकि अगर आप किसी कंपनी में डाइरेक्टर है या किसी अनलिस्टेड कंपनी में आपके शेयर हैं, तो आप यह फॉर्म नहीं भर सकते हैं.

ITR-2: यह फॉर्म 50 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई वाले उन भारतीयों के लिए है, जो किसी बिजनेस से प्रॉफिट नहीं कमा रहे हैं. इसमें एक से ज्यादा आवासीय संपत्ति, इन्वेस्टमेंट पर हुए कैपिटल गेन या लॉस, 10 लाख रुपये से ज्यादा की डिविडेंड इनकम और खेती से हुई 5000 रुपये से ज्यादा की कमाई की जानकारी देनी होती है. अगर प्रॉविडेंट फंड से ब्याज के तौर पर कमाई हो रही है, तब भी यही फॉर्म भरना होगा.

ITR-3: अगर आपको किसी बिजनेस के प्रॉफिट से कमाई हो रही है तो यह फॉर्म भरना होगा. इसमें आईटीआर-1 और आईटीआर-2 में दी जाने वाली सभी इनकम की जानकारी देनी होती है. शेयर या प्रॉपर्टी की बिक्री से कैपिटल गेन और ब्याज या डिविडेंड से इनकम में भी यही फॉर्म भरना होता है.

ITR-4: इसे सुगम के नाम से भी जाना जाता है. यह फॉर्म 50 लाख रुपये से ज्यादा कमाई वाली उन कंपनियों के है, जिन्हें 44एडी, 44एडीए या 44एई जैसे सेक्शंस के दायरे में आने वाली कमाई हो रही है. एलएलपी के लिए यह फॉर्म नहीं है.

ITR-5: यह फॉर्म एलएलपी, एसोसिएशन ऑफ पर्सन्स, बॉडी ऑफ इंडिविजुअल्स, आर्टिफिशियल ज्यूरीडिकल पर्सन, को-ऑपरेटिव सोसाइटी और लोकल अथॉरिटी आदि के लिए है.

ITR-6: यह फॉर्म उन कंपनियों के लिए है, जिन्होंने सेक्शन 11 के तहत छूट का दावा नहीं किया हो. सेक्शन 11 के तहत वैसी आय पर टैक्स से छूट मिलती है, जो किसी परमार्थ या धर्मार्थ कार्य के लिए ट्रस्ट के पास रखी संपत्ति से हो रही हो.