पंजाब में ठंडी हवाओं का दौर जारी, बूंदाबांदी से तापमान में 12 डिग्री की गिरावट दर्ज

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पंजाब डेस्कः पहाड़ों में होने वाली बर्फबारी के चलते पंजाब में ठंडी हवाओं का दौर दिनभर जारी रहा। वहीं सुबह से शुरू हुई हल्की बूंदा-बांदी से तापमान में 12 डिग्री तक की रिकार्ड गिरावट दर्ज हुई है। अप्रैल महीने के अंतिम दिनों में इस तरह का मौसम हैरान करने वाला है, क्योंकि भीषण गर्मी के दिन शुरू हो चुके हैं और हवा में ठंडक के चलते आज ए.सी. का इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं पड़ी। मौसम में हुए बदलाव के चलते पंजाब में न्यूनतम तापमान 19-20 डिग्री से नीचे चला गया, जिससे मौसम विशेषज्ञ भी हैरान हैं।

पिछले 3-4 दिनों से पहाड़ों में लगातार बर्फबारी हो रही है, जिसके चलते पहाड़ों की तरफ से आने वाली ठंडी हवाओं से पंजाब की हवा में नमी की मात्रा बढ़ गई है। इससे ठंडक का एहसास होने लगा है और तापमान में एकाएक गिरावट दर्ज हुई है। इसी क्रम में जालंधर में न्यूनतम तापमान 18-19 डिग्री, जबकि अधिकतम तापमान 26-27 डिग्री रिकार्ड किया गया। जिक्रयोग्य है कि कुछ दिन पहले तक जालंधर का तापमान 38 डिग्री के पास पहुंच चुका था। इसी तरह से पठानकोट में 17-18 डिग्री तापमान रहा, जबकि सबसे कम तापमान फिरोजपुर जिलों में रिकार्ड किया गया है, जोकि 17 डिग्री के करीब बताया गया है। महानगर जालंधर में शनिवार रात को मौसम का मिजाज बदल चुका था और हलकी बूंदा-बांदी शुरू होने की संभावना बन चुकी थी। सुबह के समय तेज बारिश ने दस्तक दी जबकि कुछ देर बाद बारिश थमने के बावजूद तापमान एकदम से नीचे चला गया।शहरी इलाके में बारिश का जोर कम रहा, जबकि देहात के कुछ एक इलाकों में जमकर बारिश हुई। मौसम विभाग के चंडीगढ़ केन्द्र द्वारा जारी किए गए पूर्वानुमान के मुताबिक मंगलवार को धूप निकलेगी लेकिन पहाड़ों में होने वाली मौसम बदलाव के चलते पंजाब के मैदानी इलाकों में मौसम का मिजाज एकाएक बदल सकता है।

मंडियों में पड़ी फसलों के रख-रखाव में अभाव
वहीं, 
मंडियों में खुले में पड़ी गेंहू की बोरियां बारिश में भीगते हुए देखने को मिली। यहां पर कई शैड होने के बावजूद बोरियों को खुले में रखा हुआ है, जिसके चलते एकाएक बारिश आने के बाद बोरियां भीगने लगती है और गेंहू की फसल को नुकसान होता है। कई बार इस संबंधी खबरें प्रकाशित हो चुकी है लेकिन प्रशासन द्वारा उचित कदम नहीं उठाए जाते। जानकारों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से मौसम बदलने की संभावना बन रही थी, इसलिए संबंधित विभाग को गेंहू की फसल के रख-रखाव का उचित प्रबंधन कर लेना चाहिए था, ताकि बारिश आने पर कोई नुकसान न होता।